जयति जय गायत्री माता, तुम हो वेद पुराणों की ज्ञाता
सारे जगत में प्रकाश ज्ञान का तुमने ही तो फैलाया
सत्य सनातन रूप तुम्हारा, हंसा तेरी सवारी
श्वेत शुद्ध है वस्त्र तुम्हारे, पुस्तक कमंडल धारी
जो कोई ध्यान करें तुम्हारा दुख और रोग निकट नहीं आये
मंत्र में तुम्हारी इतनी शक्ति अविद्या और पाप को भी भगाये
जयति जय गायत्री माता, तुम हो वेद पुराणों की ज्ञाता
सारे जगत में प्रकाश ज्ञान का तुमने ही तो फैलाया
तुम्ही हो लक्ष्मी तुम्ही सरस्वती, तुम्ही हो जग जननी भवानी
तुम्ही माता हर दिशा में, तुमसे बढकर कौन जहाँ में
सारे ग्रह और नक्षत्र को तुमने ही गतिवान बनाया
तुमने ही ब्रह्मांड रचाया, तुम्ही हो इसकी प्राण विधाता
जयति जय गायत्री माता, तुम हो वेद पुराणों की ज्ञाता
सारे जगत में प्रकाश ज्ञान का तुमने ही तो फैलाया
सारे जगत में प्रकाश ज्ञान का तुमने ही तो फैलाया
सत्य सनातन रूप तुम्हारा, हंसा तेरी सवारी
श्वेत शुद्ध है वस्त्र तुम्हारे, पुस्तक कमंडल धारी
जो कोई ध्यान करें तुम्हारा दुख और रोग निकट नहीं आये
मंत्र में तुम्हारी इतनी शक्ति अविद्या और पाप को भी भगाये
जयति जय गायत्री माता, तुम हो वेद पुराणों की ज्ञाता
सारे जगत में प्रकाश ज्ञान का तुमने ही तो फैलाया
तुम्ही हो लक्ष्मी तुम्ही सरस्वती, तुम्ही हो जग जननी भवानी
तुम्ही माता हर दिशा में, तुमसे बढकर कौन जहाँ में
सारे ग्रह और नक्षत्र को तुमने ही गतिवान बनाया
तुमने ही ब्रह्मांड रचाया, तुम्ही हो इसकी प्राण विधाता
जयति जय गायत्री माता, तुम हो वेद पुराणों की ज्ञाता
सारे जगत में प्रकाश ज्ञान का तुमने ही तो फैलाया